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Share market इन्वेस्टमेंट की income पर टैक्स। शेयर मार्किट की कमाई पर कितना टैक्स लगता है। समझे आसान भाषा में।

अगर आप भी यह जानना चाहते हो कि आपके द्वारा शेयर मार्केट में कमाएं गए लाभ पर आपको कितना टैक्स देना पड़ेगा तो इस ब्लॉग को ध्यान से पढ़ें।

वर्ष 2018 से पहले जब भी कोई शेयर मार्केट में प्रॉफिट कमाता था तो उसको उस प्रॉफिट पर किसी प्रकार का कोई टैक्स नहीं देना होता था। परंतु वर्ष 2018 के बाद केंद्र सरकार द्वारा शेयर मार्केट पर होने वाली आय पर टैक्स लगा दिया गया।

इसके बाद लोगों ने इसका बहुत विरोध किया। जिस कारण सरकार ने इसमें कुछ रियायत भी दी। आज हम आपको शेयर मार्केट में होने वाले प्रॉफिट के ऊपर लगने वाले टैक्स का सारा गणित समझाते हैं।

आज हम आपको शेयर मार्किट में डिलीवरी पर शेयर लेने पर कितना टैक्स लगता है इसके बारे में बताएंगे और इसे कैसे कम किया जाए इसके बारे में भी आपको समझाते है।

शेयर मार्किट में capital gains पर लगने वाला टैक्स –

शेयर मार्केट में कितना टैक्स लगता है इस बात का निर्धारण यह बात करती है कि आपने अपनी इन्वेस्टमेंट शॉर्ट टर्म के लिए की है या फिर लॉन्ग टर्म के लिए की है।

इसलिए सबसे पहले हमें शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के बारे में जानना जरूरी है। क्योंकि जो भी शेयर हम डिलीवरी में लेते है वो चाहे थोड़े समय के लिए हो या फिर ज्यादा समय के लिए वो capital gains head में गिने जाते है।

शार्ट टर्म इन्वेस्टमेंट – शेयर मार्केट के रूल के अनुसार हम जो भी पैसा 1 साल से कम की अवधि के लिए इन्वेस्ट करते हैं उसे शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट कहा जाता है

लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट – शेयर मार्केट के रुल के अनुसार हम जो पैसा 1 वर्ष से ज्यादा के लिए इन्वेस्ट करते हैं उसको लोंग टर्म इन्वेस्टमेंट कहा जाता है।

शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट पर लगने वाला टैक्स –

जब भी हम शेयर मार्केट में अपना पैसा इन्वेस्ट करते हैं तो उस पर जितना भी प्रॉफिट होता है उसमें से हमें कुछ हिस्सा सरकार को टैक्स के रूप में देना पड़ता है। यह टेक्स अलग-अलग परसेंटेज में देना पड़ता है।

जब हम अपना पैसा शॉर्ट टर्म के लिए इन्वेस्ट करते है तो हमें इस इन्वेस्टमेंट पर जितना भी प्रॉफिट होता है उसका 15 प्रतिशत टैक्स के रूप में सरकार को देना होता है।

जैसे कि हम 1 जनवरी 2021 को एक लाख रूपये इन्वेस्ट करते हैं। और हम इसे 1 जनवरी 2022 यानि 1 साल की अवधि पूरा होने से पहले एक लाख दस हज़ार में बेच देते हैं और इससे हमें दस हज़ार का लाभ हुआ।

अब क्योंकि यह एक शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट है क्योंकि यह इन्वेस्टमेंट हमने 1 साल की अवधि पूरी होने से पहले ही बेच दी है। इसीलिए हम को इस इन्वेस्टमेंट पर होने वाले लाभ पर इनकम टैक्स सेक्शन 111A के अनुसार 15 प्रतिशत यानि की दस हज़ार के लाभ पर 15 प्रतिशत टैक्स मतलब 1500 रूपये सरकार को देने होंगे।

इसी प्रकार अगर हम यही इन्वेस्टमेंट 1 साल पूरा होने के बाद बेचते तो यह एक लोंग टर्म इन्वेस्टमेंट माना जाता। और शेयर मार्केट के रूल के अनुसार लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट पर होने वाले प्रॉफिट पर हमें 10 प्रतिशत टैक्स के रूप में देना होता है।

अगर हम इन्वेस्टमेंट ₹100000 मान लें और प्रॉफिट 10000 रूपये माने तो हमें लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के रूल के अनुसार 10 प्रतिशत यानि 1000 रूपये टैक्स के रूपये में सरकार को देने होंगे।

परन्तु लोंग टर्म कैपिटल गेन का एक फायदा है कि इसमें पहले एक लाख तक के प्रॉफिट पर कोई भी टैक्स नहीं लगता।

इस प्रकार हम समझ सकते है की शार्ट टर्म इन्वेस्टमेंट प्रॉफिट पर हमें 10 प्रतिशत और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट प्रॉफिट पर हमें 15 प्रतिशत टैक्स के रूप में देने होते है।

शेयर मार्किट टैक्स को कैसे कम कर सकते है –

1. टैक्स स्लैब के अनुसार शेयर मार्किट में इनकम टैक्स की बचत अगर आप भी टैक्स स्लैब के अनुसार ढाई लाख तक की टैक्स स्लैब के अंदर आते हो तो आपको शेयर मार्केट की इनकम पर हाई लाख तक कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा।

मतलब अगर आप शेयर मार्केट से चार लाख रुपए कमाते हो और ढाई लाख की इनकम टैक्स स्लैब में आते हो तो आपको चार लाख में से ढाई लाख की इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा और डेढ़ लाख की इनकम पर टैक्स देना पड़ेगा।

इस प्रकार आप अपने प्रॉफिट चार लाख में से ढाई लाख रूपये की इनकम पर टैक्स बचा सकते हो।

2. कैपिटल लॉस को कैपिटल गेन से सेट ऑफ करना – अगर आपको शेयर मार्केट में किसी प्रकार का कैपिटल लॉस होता है तो आप उसे कैपिटल गेन से भी सेट ऑफ कर सकते हैं।

मतलब अगर आप किसी शेयर को खरीदते हो और उसमें आपको नुकसान हो जाता है परंतु किसी दूसरे शेयर पर आपको प्रॉफिट हो जाता है तो आप उस नुकसान को उस प्रॉफिट से सेट ऑफ़ कर सकते हो

इसे हम इस प्रकार भी समझ सकते हैं जैसे अगर आप टाटा कंपनी का कोई शेयर खरीदते हैं और उसमें आपको चार लाख का प्रॉफिट हो जाता है। मगर दूसरी जगह आप किसी और कंपनी का शेयर खरीदते हैं और उसमें आपको दो लाख का नुकसान हो जाता है। तो आप चार लाख में से दो लाख को निकाल कर दो लाख पर ही टैक्स दे। इस प्रकार आप अपने प्रॉफिट पर टैक्स बचा सकते हैं।

इसके अलावा आप अपने लॉस को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड भी कर सकते हैं। मतलब इस साल में जो भी नुकसान हुआ है उसको अगले साल के फायदे से सेट ऑफ कर सकते है। और इसे आप 8 साल तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। मगर यह तभी कर सकते हैं जब आप आपका इनकम टैक्स ड्यू डेट पर पर देते हैं।

मगर इसके लिए ध्यान रहे कि लॉन्ग टर्म कैपिटल लॉस को आप सिर्फ लोंग टर्म कैपिटल गेंस के साथ ही सेट ऑफ कर सकते हैं। मगर इसके विपरीत आप शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन को लोंग टर्म कैपिटल गेन और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन दोनों के साथ सेट ऑफ कर सकते हैं।

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