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Personal finance

50-30-20 नियम क्या है। What is 50-30-20 rule in personal finance in hindi

50-30-20 नियम क्या है –

अभी हाल हीं मे एक बड़ी कम्पनी के एक बड़े अधिकारी ने कर्ज की वजह से आत्महत्या कर ली। ऐसी हीं ना जाने कितनी खबरें हम दिन भर मे सुनते रहते है। क्या अपने कभी सोचा है की इतनी बड़ी कम्पनी का इतना बड़ा अधिकारी जो की इतनी बड़ी तनख्वाह लेता है और फिर भी पैसो की तंगी के कारण आत्महत्या कर लेता है।

है ना विडंबना। आजकल यह विडंबना हर तीसरे घर मे मिल जाती है। ना जाने ऐसे कितने हीं लोग है जो अपने जीवन मे बहुत पैसा कमाते है मगर अंत मे उनके पास पैसे की तंगी होती है।

वैसे तो इसके अनगिनत उदाहरण है मगर इसका एक जीता जगता उदाहरण एक मशहूर बॉक्सर माइक टाइसन भी है। जिन्होंने अपने करियर मे बहुत पैसा कमाया। बल्कि इतना पैसा की वह अपने समय के सबसे अमीर खिलाड़ियों की सूची मे थे। मगर कुछ हीं सालों बाद वह ग़रीबी से जूझ रहे थे।

इन सबका एक हीं कारण है और वह है आपकी पैसे को लेकर मिस – मैनेजमेंट। अगर आपको पैसे के बारे मे ज्ञान नहीं है तो आप चाहे कितना भी कमा लो बाद मे आपको पैसो की तंगी देखनी पड़ सकती है।

इसीलिए आज हम आपको आज सीनेटर एलिजाबेथ वारेन के द्वारा लिखी गई मशहूर किताब ‘ आल योर वर्थ  : अल्टीमेट लाइफटाइम मनी प्लान ‘ के पॉपुलर  50-30-20 नियम के बारे मे बताएंगे। जो आपको यह बताएगा की आप अपने पैसे को कहा पर प्रयोग करें ताकि आपको बाद मे ग़रीबी का सामना ना करना पड़े।

यह नियम उन लोगों के लिए भी बहुत लाभकारी है जो कहते है की हमारे पास कितने भी पैसे आ जाये परन्तु टिकते भी है और सारे के सारे खर्च हो जाते है।

क्योंकि आपने भी देखा होगा की बहुत आपके सगे – संबंधी और दोस्त जो अच्छी खासी तनख्वाह तो लेते है मगर यही कहते रहते है की हमारे पास महीने के आखिर मे कुछ नहीं बचता। इसका कारण उनका धन प्रबंधन मे अच्छा ना होना होता है।

क्योंकि वे अपनी सैलरी के आते हीं उसे अंधाधुंध खर्च करते है। और महीने की 20 तारीख तक हीं उनके पास पैसो की कमी हो जाती है।

इसके बाद वे कर्ज या क्रेडिट कार्ड का सहारा लेते है जिस पर उनको कई बार मोटा ब्याज भी देना पड़ता है जो उनके खर्च को अनावश्यक रूप से बड़ा देता है।

जिस कारण उनको अगले महीने की सैलरी का बेसब्री से इंतज़ार होता है और उसके आते हीं वो पहला कर्ज उतारने के साथ – साथ ऐसे हीं खर्च करते है जिस कारण आने वाली 15 या 20 तारीख तक उनका हाल वैसा हीं हो जाता है।

और फिर यह एक प्रकार का cycle बन जाता है जो उनको कर्ज की तरफ ले जाता है। इसीलिए आज हम आपको इसलिए cycle से छुटकारा कैसे पाया जाये या फिर आप इस cycle मे फंसने से कैसे बचें रहे इसका सारा गणित इस 50-30-20 नियम से बताने जा रहे है। यह नियम short term और long term दोनों के लिए उपयोगी है।

50-30-20 नियम की परिभाषा

50-30-20 का नियम व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन ( personal finanace ) के अंतगर्त आने वाली एक सरल बजटिंग रणनीति है जो आपके कुल मासिक आय को तीन भागों मे बाँटती है। इसके अंतगर्त हम अपनी मासिक आय को तीन भागो मे बांटते है।

इसका सरल सा गणित यह है की हमें अपनी आय को तीन भागों मे बाँटना है। जैसे की हमारे पास 100 रूपये है तो इसको हमने अलग – अलग 50, 30 और 20 रूपये मे बाँट लेना है और फिर इसे किस प्रकार प्रयोग करना है इसे अब विस्तार से समझते है।

50 –

अब हमारी पूरी आय 100 रूपये मे से जो 50 रूपये हमने अलग रखे थे वह रूपये हमें अपने जरूरी खर्चो के लिए रखने है। मतलब जो की जीवन चलाने के लिए बेहद जरूरी खर्चे होते है। जैसे की हमारा घर का किराया, भोजन, आने जाने का किराया, सभी प्रकार के बिल इत्यादि।

मतलब जो खर्चे हमारे लिए बेसिक होते है उन खर्चो के लिए हमने ये 50 रूपये रख लेने है। इसका मतलब है की हमें अपनी आय का आधा भाग अपने जरूरी खर्चो के लिए अलग से रख लेना है।

30 –

अब 50-30-20 के नियम मे बारी आती है हमारे दूसरे खर्चो की जिसमे की मनोरंजन, शॉपिंग या फिर अन्य वे चीजे शामिल है जो हम जिंदगी मे मजे लेने के लिए करते है। इन सभी खर्चो के लिए हमें 100 रूपये मे से 30 रूपये रख लेने है।

20 –

अब बारी आती है उस 20 रूपये की जो अभी 100 रूपये मे से हमारे पास बचें है। यह वह रुपया है जिसे हम अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए निवेश करते है। इसलिए पैसे को हमें निवेश करने के लिए, किसी कर्ज को उतारने के लिए, या किसी अचानक आयी मुसीबत के लिए, या फिर अन्य किसी भी आपातकालीन स्तिथि के लिए रख सकते हो।

दोस्तों ये 50-30-20 का नियम अपनाकर आप अपने पैसे का अच्छे से प्रबंधन कर सकते हो। और अपने पैसे का अच्छे से उपयोग कर सकते हो और उस भीड़ से बच सकते हो जो बिना पैसो के प्रबंधन की वजह से अपने आपको कर्ज मे घिरा हुआ महसूस करती है।

कमी और सुधार

50-30-20 नियम का एक कमी यह है की यह नियम आपको अपनी आय को 50-30-20 मे बाँटने के लिए प्रेरित करता है।  परन्तु ज़ब आपकी आय बढ़ जाती है तो इसलिए नियम के तहत आपके पास खर्च करने के लिए जो 50 और 30 प्रतिशत वाले हिस्से मे आता है वह भी बढ़ जाता है। और इस नियम के अनुसार आपको यह बढ़ा हुआ खर्च करना चाहिए।

परन्तु इसमें सुधार के लिए आप यहाँ अपने खर्चो को पहले की तरह हीं सीमित रखकर अपना निवेश का अनुपात 20 से ज्यादा कर सकते हो। जो आपके लिए बहुत अच्छा निर्णय होगा। और अपने खर्चो को पहले की आय के अनुसार सीमित रखते हुए बाकि का पैसा अपने 20 वाले हिस्से मे रख ले। यह एक अच्छा वित्तीय निर्णय होगा।

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