भारतीय शेयर बाजार क्यों गिर रहा है। इसके लिए कौन है जिम्मेवार और यह कहाँ पर रुकेगा जानिए सब।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट कारण –
भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) हमेशा से ही निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यह बाजार अपनी उच्च अस्थिरता (Volatility) और तेजी से बदलते रुझानों के लिए जाना जाता है।
हाल के दिनों में, भारतीय शेयर बाजार में गिरावट (Market Crash) देखी गई है, जिसने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। इस ब्लॉग में, हम विस्तार से जानेंगे कि भारतीय शेयर बाजार कितनी गिरावट तक जा सकता है, यह गिरावट कब रुक सकती है, और इसके पीछे के कारण क्या है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
1. वैश्विक आर्थिक मंदी (Global Economic Slowdown) –

वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी का असर भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के संकेत ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। विशेष रूप से, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा की है।
2. मुद्रास्फीति (Inflation) –
भारत में मुद्रास्फीति की दर में वृद्धि ने भी शेयर बाजार को प्रभावित किया है। उच्च मुद्रास्फीति के कारण, केंद्रीय बैंक (RBI) ने ब्याज दरों में वृद्धि की है, जिससे कंपनियों की उधार लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और शेयर की कीमतों पर पड़ा है।
3. रुपये की कमजोरी (Weakening Rupee) –
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी बाजार को प्रभावित किया है। रुपये की कमजोरी के कारण, आयात महंगा हो गया है, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ी है और उनके शेयर की कीमतों पर दबाव पड़ा है।
4. तेल की कीमतों में वृद्धि (Rising Crude Oil Prices) –
भारत एक तेल आयातक देश है, और तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल की कीमतों में वृद्धि से व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ता है, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।
5. FII का निकास (FII Outflow) –
विदेशी संस्थागत निवेशक (Foreign Institutional Investors – FII) भारतीय शेयर बाजार में बड़े निवेशक होते हैं। हाल के दिनों में, FII ने भारतीय बाजार से अपने निवेश को वापस लेना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में गिरावट आई है।
भारतीय शेयर बाजार कितनी गिरावट तक जा सकता है?
भारतीय शेयर बाजार की गिरावट की सीमा को समझने के लिए, हमें कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी और मौलिक स्तरों (Technical and Fundamental Levels) को देखना होगा।
1. तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) –
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, Nifty 50 और Sensex के लिए महत्वपूर्ण स्तर (Support Levels) हैं:
– Nifty 50: 15,000 से 14,500 के बीच
– Sensex: 50,000 से 48,000 के बीच
यदि बाजार इन स्तरों को तोड़ देता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।
2. मौलिक विश्लेषण (Fundamental Analysis) –
मौलिक विश्लेषण के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर निर्भर करता है कि बाजार कितनी गिरावट तक जा सकता है। यदि मुद्रास्फीति और ब्याज दरों में वृद्धि जारी रहती है, तो बाजार और नीचे जा सकता है।
गिरावट कब रुक सकती है?
गिरावट के रुकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कारकों पर ध्यान देना होगा:
1. वैश्विक बाजारों में स्थिरता (Global Market Stability)
यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में वृद्धि रोक देता है, तो भारतीय शेयर बाजार में सुधार देखा जा सकता है।
2. मुद्रास्फीति में कमी (Reduction in Inflation)
यदि भारत में मुद्रास्फीति की दर में कमी आती है और RBI ब्याज दरों में कटौती करता है, तो इससे कम्पनीयों की लागत घट जाएगी, जिससे बाजार में सुधार हो सकता है।
3. FII का वापसी (FII Inflow)
यदि FII फिर से भारतीय बाजार में निवेश करना शुरू कर देते हैं, तो बाजार में तेजी आ सकती है।
4. तेल की कीमतों में कमी (Fall in Crude Oil Prices)
तेल की कीमतों में कमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी, जो शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत होगा।
गिरावट कहाँ रुक सकती है?
गिरावट के रुकने के लिए, बाजार को कुछ महत्वपूर्ण स्तरों (Key Levels) पर स्थिरता मिलनी चाहिए। ये स्तर हैं:
– Nifty 50: 14,500 से 14,000 के बीच
– Sensex: 48,000 से 46,000 के बीच
यदि बाजार इन स्तरों पर स्थिर हो जाता है, तो गिरावट रुक सकती है और बाजार में सुधार शुरू हो सकता है।
निष्कर्ष –
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें वैश्विक आर्थिक मंदी, मुद्रास्फीति, रुपये की कमजोरी, तेल की कीमतों में वृद्धि और FII का निकास शामिल हैं। यह गिरावट कितनी गहरी हो सकती है और कब रुक सकती है, यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे वैश्विक बाजारों में स्थिरता, मुद्रास्फीति में कमी, FII का वापसी और तेल की कीमतों में कमी।
निवेशकों को इस समय सतर्क रहना चाहिए और अपने निवेश की समीक्षा करनी चाहिए। तकनीकी और मौलिक विश्लेषण का उपयोग करके, निवेशक बाजार में आने वाले अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।