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शेयर बाजार

अमेरिकी शेयर बाजार का भारतीय बाजार पर प्रभाव कैसे: समझें पूरी कहानी 

अमेरिकी शेयर बाजार का भारतीय बाजार पर प्रभाव –

आज के ग्लोबलाइज्ड दुनिया में, शेयर बाजार अब सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिकी शेयर बाजार (जैसे dow Jones, NASDAQ, और S&P 500) में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स और निफ्टी) पर पड़ता है। लेकिन कैसे? आइए इसकी पूरी जानकारी सरल और आसान भाषा में समझते हैं। 



अमेरिकी बाजार और भारतीय बाजार का कनेक्शन –

1. ग्लोबल इकोनॉमिक लिंक –

अमेरिकी अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जब अमेरिकी बाजार में गिरावट आती है, तो यह दुनिया भर के निवेशकों के मन में अनिश्चितता पैदा करती है। जिससे निवेशकों के मन मे डर की स्तिथि पैदा हो जाती और वें शेयर बेचने लगते है जिससे भारतीय शेयर बाजार मे भी गिरावट का भय होता है।

2. FII का प्रभाव – 

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब अमेरिकी बाजार गिरता है, तो FII भारतीय बाजार से पैसा निकालकर अमेरिका या अन्य सुरक्षित जगहों पर निवेश करते हैं। जिससे भारतीय शेयर बाजार मे गिरावट आने का भय रहता है।

3. करेंसी का रोल –

अमेरिकी बाजार में गिरावट से डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो सकता है। इससे भारतीय कंपनियों के आयात महंगे हो जाते हैं, जिस कारण उनको अपने उत्पाद ऊँचे दामों मे बेचने पड़ते है जिस कारण उनका लाभ कम हो जाता है। इससे शेयर मार्किट मे गिरावट का भय रहता है।

4. व्यवसायिक राजनीती –

भारत और अमेरिका के व्यापार संबंध कैसे है और अमेरिका भारत के निर्यात और आयत पर कितना टेरिफ़ लगाता है यह बात भी दोनों देशो की शेयर मार्किट को कनेक्ट करती है।

अमेरिकी बाजार गिरने के भारतीय बाजार पर प्रभाव –  

1. मार्केट सेन्टिमेंट –

अमेरिकी बाजार में गिरावट से भारतीय निवेशक भी डर जाते हैं। इससे बाजार में बिकवाली (सेल-ऑफ) का दबाव बढ़ता है। जिससे मार्किट मे डर का माहौल बन जाता है और बाजार मे गिरावट का दौर शुरू होता है।

2. सेक्टरवाइज असर –  
   – IT सेक्टर –  भारतीय आईटी कंपनियों का अमेरिका पर बड़ा निर्भरता है। अमेरिकी बाजार में गिरावट से इन कंपनियों के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। 
   – तेल और गैस अमेरिकी बाजार में गिरावट से कच्चे तेल की कीमतें प्रभावित होती हैं, और क्योंकि अमेरिका मार्किट लीडर है इसीलिए यह भारतीय तेल कंपनियों को भी प्रभावित करती हैं। 

अवसर –

कहते है विपदा मे अवसर भी होते है इसीलिए गिरावट के समय अच्छे शेयर सस्ते दामों पर मिल सकते हैं, जो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। 

क्या करें निवेशक?

1. पैनिक न करें – बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। घबराकर शेयर बेचने से बचें। यह आपके लिए एक मौका भी हो सकता है। इसीलिए इस स्तिथि मे खुद को शांत रखे और पूरा विश्लेषण करके ही कोई फैसला ले।

2. डायवर्सिफिकेशन – अपने पोर्टफोलियो को अलग-अलग सेक्टर और एसेट क्लास में फैलाएं। क्योंकि एक कहावत है की अगर सभी अंडे एक टोकरी मे होंगे तो उस टोकरी के गिरते ही सभी फुट जायेगे। इसीलिए अपने पोर्टफोलियो मे डाईवेरफिकेशन लाये।

3. लॉन्ग टर्म फोकस – अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो बाजार की गिरावट को अवसर के रूप में देखें। क्योंकि ऐसी स्तिथियां ही अच्छे निवेशकों को निखारती है।

निष्कर्ष –
अमेरिकी शेयर बाजार का भारतीय बाजार पर प्रभाव स्पष्ट है, लेकिन यह हमेशा नकारात्मक नहीं होता। सही जानकारी और रणनीति के साथ, निवेशक इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं। अगर आप शेयर बाजार में नए हैं, तो बाजार के ट्रेंड को समझने और निवेश से पहले रिसर्च करने पर जोर दे।

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