ऑप्शन ट्रेडिंग क्या होती है
ऑप्शन ट्रेडिंग – एक जोखिम भरी यात्रा
ऑप्शन ट्रेडिंग शेयर बाजार का एक जटिल लेकिन रोमांचक पहलू है। यह एक ऐसी रणनीति है जहां निवेशक एक निश्चित समय अवधि के भीतर, एक निश्चित मूल्य पर, एक निश्चित स्टॉक या अन्य परिसंपत्ति खरीदने या बेचने का अधिकार खरीदता है, लेकिन बाध्य नहीं होता है।
कॉल और पुट ऑप्शन
ऑप्शन ट्रेडिंग में मुख्य रूप से दो प्रकार के ऑप्शन होते हैं:
- 1. कॉल ऑप्शन – यह खरीदार को एक निश्चित समय अवधि के भीतर, एक निश्चित मूल्य पर, एक निश्चित स्टॉक खरीदने का अधिकार देता है।
- 2. पुट ऑप्शन – यह खरीदार को एक निश्चित समय अवधि के भीतर, एक निश्चित मूल्य पर, एक निश्चित स्टॉक बेचने का अधिकार देता है।
ऑप्शन ट्रेडिंग के फायदे - ऑप्शन ट्रेडिंग के फायदे –
- 1. सीमित जोखिम – ऑप्शन ट्रेडिंग में निवेशक को केवल प्रीमियम का भुगतान करना होता है, जो कि उस स्टॉक की पूरी कीमत की तुलना में बहुत कम होता है।
- 2. लाभ की संभावना – ऑप्शन ट्रेडिंग में उच्च रिटर्न की संभावना होती है, क्योंकि छोटे निवेश से बड़े लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
- 3. लचीलापन – ऑप्शन ट्रेडिंग निवेशकों को विभिन्न रणनीतियों का उपयोग करने की अनुमति देता है, जैसे कि स्ट्रैडल, स्ट्रैंगल, और कंडोर स्प्रेड्स।
ऑप्शन ट्रेडिंग के जोखिम। - ऑप्शन ट्रेडिंग के नुकसान –
- 1. अधिक जटिलता – ऑप्शन ट्रेडिंग शेयर बाजार की तुलना में अधिक जटिल है, और इसे समझने में समय लग सकता है।
- 2. उच्च अस्थिरता – ऑप्शन की कीमतें अत्यधिक अस्थिर हो सकती हैं, जिससे निवेशकों को नुकसान हो सकता है।
- 3 .समय क्षय – समय के साथ ऑप्शन का मूल्य कम होता जाता है, जिसे समय क्षय कहते हैं।
निष्कर्ष –
ऑप्शन ट्रेडिंग एक शक्तिशाली उपकरण हो सकता है, लेकिन यह जोखिम भरा भी है। निवेशकों को ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू करने से पहले अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए और जोखिम प्रबंधन की रणनीतियों का पालन करना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि निवेशक केवल उतना ही निवेश करें जितना वे खोने के लिए तैयार हों।